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जीवन के प्रथम पायदान से अंतिम
पायदान तक माँ और गौ के बिना कोई संस्कार आकार नहीं लेता तो फिर दोनों
के प्रति हमारे मस्तिष्क में विचार क्यू पैदा हुए ! 33 करोड़ देवताओ
की जजनी का तिरस्कार कर हम यदि किसी भी परमात्मा के द्वार पर नमस्कार
करेंगे तो भी देवता हमारा नमस्कार स्वीकार नहीं करेंगे , अपनी स्वार्थ
पूर्ति के लिए हम हर हाल में अकाल हो या सुकाल, उसे पूरा कर ही लेते
है , लेकिन गौ माँ के लिए एक पुला चारे डालने की सोच हमारी कहा गायब
हो गई ! हमारे संस्कार , हमारी संस्कृति , हमारी प्रकृति में कल तक
यह था की पहली रोटी गाय की , छेली ( अंतिम ) कुते की और एक मुठ्ठी अनाज
कबूतर के डाले बिना दिन का श्री गणेश नहीं होता था पर आज स्वार्थ की
अंधी दौड़ में खेत खलियान से गौवंश कत्लखानो की भेट चढ़ रही है , जैसे
देश की पहचान गौ संस्कति से रही , वो पहचान कत्लखानो की तीखी छुरियो
से कटकर खून में तब्दील होकर ख़त्म हो रही है , इस कलंक से बचने के लिए
प्रत्येक भारतवासी को मुक्त होना होगा , अन्यथा इस अपराध की सजा क्या
होगी कहने और सोचने के दायरे से बहुत बाहर है , अतः आप सभी इस गौ रक्षा
सेवा अनुष्ठान में सेवा देकर भाग्य शाली बनने का सुअवसर प्राप्त कर
जीवन को धन्य बनावे ! |
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